नागदा - जो आत्मा धर्मकार्य करती है वह निर्वाण प्राप्त कर मोक्ष प्राप्त करती है - मुनि चन्द्रयशविजयजी



Nagda(mpnews24)।  चातुर्मास के दौरान प.पू. चन्द्रयशविजयजी एवं जिनभद्रविजयजी ने धर्मसभा में बताया कि उत्तरायन सूत्र मे भगवान महावीर बताते है कि मानव की आत्मा निर्वाण और निगोध दो जगह अधिक समय तक रह सकती। मानव भव से निगोध और निर्वाण दोनों प्राप्त कर सकते है। जो आत्मा धर्मकार्य करती है वह निर्वाण प्राप्त कर मोक्ष प्राप्त करती है। निगोध के अन्दर आत्मा का जन्म स्थायी होता है। उपर सिद्धशिला है बीच में निगोध है और नीचे नरक है। 14 राजलोक के अन्दर निगोध जीव है। जिसने प्रमाद को नही किया, जीवन को जीत लिया। संयम और नियम के आगे का शब्द हटा दिया जाय तो यम हो जाता है। इंसान वही महान है जिससे सब प्रेरणा लेते है। बाकी लोग बड़ा दिखाने का ढोंग करते है। मानव जीवन जैसे पेड़ खजूर, चड़े तो रसपान, गिरे तो चकनाचूर। जीवन मे धर्म करने की इच्छा बहुत है पर अनुकूलता नही है। तो ऐसे लोगो को फिर से मानव जन्म मिल जायेगा। लेकिन जिसके जीवन में अनुकूलता है वह धर्म की जगह पाप करता है उसे मानव जीवन नही मिलता है। मानव का जीवन  जीवित रहते भी सुख देता है और बाद मे भी सुख देने वाला है। अध्यात्म के माध्यम से मानव जीवन- जन्मो जन्मो का सुख का खजाना है। जीव मात्र के प्रति मेत्री भाव नही है तो भी आपके आत्म उद्धार के प्रयास कभी सफल नही होंगे।

भगवान महावीर कहते है कि एक भी व्यक्ति के प्रति मेत्री भाव नही होने पर हमे मुक्ति प्राप्त नही करने देता है। भगवान कहते है जो मानव जीवन की गरिमा नही जानता है वह क्षम्य है। लेकिन मानव जीवन की गरिमा को जानने के बावजूद पापाचार एवं व्यर्थ कार्यों मे व्यर्थ करता है वह क्षमा योग्य नही है।

इस चातुर्मासिक धर्म, ज्ञान, प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिदिन सैकड़ो व्यक्ति लाभ ले रहे है इस अवसर पर श्रीसंघ एवं आत्मोद्धारक चातुर्मास समिति के समस्त प्रमुख पदाधिकारी एवं सिद्धीतप के 101 तपस्वी उपस्थित थे।

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बचपन से पचपण तक एक साम्राज्य कर्माे का खेला-साध्वीश्री

वर्षावास में महासति पुण्यशिलाजी ने कहा कि बचपन से लगातार पचपण तक एक ही साम्राज्य चलता है कर्माे का खेला। हमने जीवन काल में जो भी कर्म किये है उनको भुगतना तो पड़ेगा लेकिन कब ? कोई नहीं जानता है। हर मानव की बस एक ही इच्छा होती है भगवान मुझे दुःख से मुक्त करे लेकिन इसके लिये सर्वप्रथम आपको कर्माे से मुक्त होना पड़ेगा। सुख के चक्कर में पाप कर बैठता है लेकिन दुःख के सिवाय कुछ नहीं मिलता। साध्वी नेहप्रभाजी ने कहा कि धर्म पालन करने वाले को धन की आवश्यकता नहीं पड़ती इससे संभावित सुख प्राप्त होता है।

चातुर्मास के मीडिया प्रभारी महेन्द्र कांठेड़ एवं नितिन बुड़ावनवाला ने बताया कि तपस्या के अनतर्गत 7 उपवास निधि पितलिया, 4 उपवास सोनाली नितिन बुडावनवाला, 4 उपवास सरिता रामसना के चल रहे है। 5 एवं 6 अगस्त दोपहर दो बजे महिला शिविर में विशेष प्रशिक्षण में विषय ‘‘वाह रे ट्वन्टी वन सेन्चुरी, विनय विवेक बिना जिन्दगी अधुरी‘‘ पर रहेगा। अतिथि सत्कार का लाभ श्रीसंघ अध्यक्ष प्रकाशचन्द्र जैन सांवेरवाला, राजेन्द्रकुमार, नरेन्द्र कुमार, सतीश जैन सांवेरवाला परिवार ने लिया।
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