MP NEWS24- सहस्त्र औदीच्य ब्राह्मण युवाओं द्वारा जन कल्याण व सनातन संस्कार की रक्षार्थ विभिन्न आयोजन किये जाते है। उसी श्रृंखला में सामूहिक पित्र तर्पण कर्म के सफल आयोजन के बाद वैकुंठ चतुर्दशी जिसे नरक चतुर्दशी भी कहते है, पर अद्भुत दीपयादी अनुष्ठान का आयोजन किया है। मान्यता है कि इस दिन नरक के द्वार खुलते है और कुटुम्बियों के द्वारा इस दिन किये गए श्राद्ध कर्म से पितरो को नरक से निकल कर दिव्य प्रकाश लेकर वैकुंठ को चले जाते है। रात्रि 3.30 बजे से चम्बल तट पर आयोजित इस सुंदर अनुष्ठान में सम्मिलित होकर शृद्धालु कृतार्थ हुए। नदी किनारे गन्ने का मंडप बनाया व वैदिक रीति से कर्मकांड विद आचार्य पंडित दीपक पंड्या व पंडित अजय पंड्या द्वारा अनुष्ठान संपन्न कराया गया।याम चतुर्दशी पर पंडित दीपक पंड्या ने होंग कॉन्ग के जजमान को नागदा से ऑनलाइन भी श्राद्ध कराया। सिद्ध मुहूर्त में कुटुम्बियों द्वारा अपने पितरों को दिप दान देकर संतुष्ट किया व फटाके चकरी फुलझड़ी चलाकर पितृ पर्व मनाया गया। कर्मकांड पंडित दीपक पण्ड्या ने बताया हमारे ऐसे पूर्वज जो मृत्यु लोक के बाद नरक भोग रहे हो, वे पवित्र प्रकाश के माध्यम से मोक्ष गति को प्राप्त करते है व परिवार जनों को आशीर्वाद प्रदान करते है। नरक चतुर्दशी के दुर्लभ योग में कुटुम्बियों द्वारा इस कर्म के करने से जाने अनजाने में हुए दोषों से मुक्ति मिलती है व परिवार जन के रुके हुए मांगलिक कार्य सम्पन्न होते है।
क्षेत्र में पहली बार हुए आयोजन में राउ पीथमपुर से भी आये शृद्धालु
वैदिक मान्यता व सनातन संस्कार से परिपूर्ण दीपयादी श्राद्ध अनुष्ठान में क्षेत्र के कई लोगो ने पहली बार सुना और सम्मिलित होकर आयोजन के साक्षी बने। आयोजन की जानकारी मिलने पर पीथमपुर और राऊ से शृद्धालु नागदा पहुचे। राउ से आये वृद्ध दंपति ने भी आयोजन में हिस्सा लिया, उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र में इस तरह के आयोजन नही होते न ही किसी ने जानकारी दी। इसलिए सोशल मीडिया पर आयोजन की जानकारी मिलने पर वे नागदा आकर सम्मिलित हुए। आचार्य पंडित अजय पंडया ने बताया कुटुम्बी, जैसे नारायण बलि, सपिण्डिनी करण,मंगल, संवत्सर (बरसी) श्राद्ध करते है उन्हें अपने पित्तरों को नरक से निकलने के लिए यह दीपयादी श्राद्ध करना चाहिए। आयोजन की सफलता के लिए सहस्त्र औदीच्य ब्राह्णण युवा अध्यक्ष नीलेश मेहता ने सभी आगंतुक व आचार्य पंडित दीपक पण्ड्या व पंडित अजय पण्ड्या का आभार माना।
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