नागदा - आत्मा कहां से आई कहां जायेगी कोई नहीं जानता-साध्वीश्री



Nagda(mpnews24) -  वर्षावास में महावीर भवन में महासति अनुपमशिलाजी म.सा. ने कहा कि हमारी आत्मा चौरासी लाख जीवायौनियों में परिभ्रमण करने के पश्चात् पुण्योदय एवं शुभकर्मो के उदय से मानव जीवन प्राप्त होता है लेकिन हमको नहीं पता कि हमारी आत्मा कहां से आई है और कहां जायेगी आत्मा अमर है शरीर नश्वर है जो भी दुःख, दर्द, तकलीफ, शारीरिक एवं मानसिक पीड़ा केवल शरीर सहन करता है। आत्मा अजर अमर है। इस पर कोई प्रभाव नहीं होता है। साध्वी नेहप्रभाजी म.सा. ने कहा कि ईश्वर ने जो मनुष्य भव दिया है इसमें आराधना से तपस्या एवं धार्मिक कार्य कर सकता है।

स्थानकवासी जैन के मीडिया प्रभारी महेन्द्र कांठेड़ एवं नितिन बुडावनवाला ने बताया कि आज दो उपवास करने वाले आराधको का लाभ प्रकाशचन्द्र कमलाबाई लुणावत सांवेरवाला, राजेन्द्रकुमार विजयाबहन जैन, नरेन्द्र कुमार शोभा बहन जैन एवं सतीशकुमार सरोजकुमार जैन द्वारा लिया गया। सामुहिक पारणे में परिवार के निलेश सीमा जैन, वैभव शिख जैन एवं उज्ज्वल जैन सांवेरवाला का विशेष सहयोग रहा।

गुरूदेव के मुखारविंद से मधुबाला निर्मल चपलोत को 14 उपवास की तपस्या के प्रत्याधान करवाये गये एवं 4 अगस्त को दोपहर को मधुबेन की तपस्या के उपलक्ष्य में श्रीमती संपतबाई चपलोत परिवार के ओर से महावीर भवन  में चौबीस का धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया है। तेले तीन उपवास की तपस्या दीक्षीता तरवेचा द्वारा की गई।

4 अगस्त को पूज्य आचार्य श्री उमेशमुनिजी अणु की मासिक पुण्यतिथि की जाप की प्रभावना का लाभ मनोहरलाल कांठैड़ एवं सुरेन्द्र पीतलिया परिवार ने लिया है। अतिथि सत्कार का लाभ प्रकाशचन्द्र राजेन्द्रकुमार नरेन्द्र कुमार एवं सतीश जैन सांवेरवाला परिवार ने लिया। आभार चातुर्मास अध्यक्ष सुनीलकुमार वोरा ने माना।


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