MP NEWS 24 मुनिराज चंद्रयशविजयजी ने सोमवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान का मंदिर भी एक तरह के पावर हाऊस हैं। जिससे हमें ऊर्जा मिलती है। भगवान का एक स्पर्श ही हमें उर्जा से भर देता है। जिनको मूर्ति मे पत्थर दिखाई देते है वह नास्तिक है, जिनको मूर्ति दिखाई देती वह आस्तिक होते है, लेकिन जिनको मूर्ति में परमात्मा दिखाई देते, वह भक्त होत है। पालिताना में विराजित आदिनाथ दादा की प्रतिमा पर तलवार के वार से नाक कट गई थी, जिसमें बहुत खून निकला था। लेकिन जब नई प्रतिमा स्थापित करने की कोशिश की तो प्रतिमा स्थापित नही हुई। इसी प्रतिमा में नाक लगा कर पुनः स्थापित की गई।
अठ्ठम तप के तेले के आयोजन में पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा स्थापना का लाभ समुतिनाथ मेहता लिया। दीपक स्थापना का लाभ सुरेन्द्र कोलन एवं गुरूदेव की स्थापना का लाभ राजेन्द्र-सुशील हिंगड़ द्वारा लिया गया। वासक्षेप का लाभ संजयकुमार-सोनव वागरेचा, आरती का लाभ ऋषभ नागदा, इंदरमल चौरड़िया द्वारा लिया गया। कार्यक्रम में श्रीसंघ अध्यक्ष हेमन्त कांकरिया, मनीष सालेचा व्होरा, चातुर्मास समिति अध्यक्ष रितेश नागदा, राजेश गेलड़ा, हर्षित नागदा, निलेश चौधरी, भंवरलाल बोहरा, सुनील कोठारी, कमलेश नागदा, अभय चोपड़ा, विरेन्द्र सकलेचा, सुरेन्द्र कांकरिया, अनोखीलाल पोखरना, यश गेलडा, आशीष चौधरी, आयुष बोहरा, ब्रजेश बोहरा, निखिल मेहता, मनोज वागरेचा, अतुल छोरिया, नमन संचेती, भावेश बुरड़, जितेन्द्र पोखरना, सहित श्रीसंघ एवं चातुर्मास समिति सदस्य उपस्थित थे।

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