नागदा जं--पीएफ ब्याज दरों में कटौती श्रमिकों के साथ सरकार का कुठाराघात - श्रमिक नेता रघुवंशी

MP NEWS24-केन्द्र सरकार द्वारा देशभर के मेहनतकश मजदूरों के खुन-पसीने की कमाई प्रोविडेंट फण्ड पर दिए जाने वाले ब्याज में कटौती करना देश के श्रमिकों के साथ कुठाराघात है। ऐसे समय जबकि महंगाई का स्तर काफी अधिक है उसी दौरान आजादी के बाद सबसे कम पीएफ ब्याजदर का किया जाना श्रमिक विरोधी कदम है।

यह बात श्रमिक नेता कैलाश रघुवंशी ने अपने जारी वक्तव्य में कही। श्री रघुवंशी ने कहा कि बढती महंगाई में कर्मचारियों का प्रोविडेंट फण्ड 9 प्रतिशत सरकार को करना था उसके स्थान पर 8.5 से घटाकर 8.1 प्रतिशत कर दिया गया है। जो कि किसी भी प्रकार से स्वीकार नहीं है। श्री रघुवंशी ने समस्त शासकीय कर्मचारियों एवं श्रम संगठनों के आगेवानों से आव्हान किया है कि वह एकजुट होकर सरकार के इस निर्णय का विरोध करें तथा जो श्रमिक देश के लिए अपना खून-पसीना बहाता है उसके साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाऐं।
हर श्रमिक के बुढापे का सहारा होता है पीएफ
श्री रघुवंशी ने कहा कि श्रमिक आज कम वेतन, महंगाई का घाटा पुरा भी नही कर पायें थे कि बुढापे के सहारे प्रोविडेंट फण्ड की राशि पर दिए जाने वाले ब्याज को भी सरकार कटोती करने पर तुल गई है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद यह सबसे न्यूनतम स्तर पर पहुॅंच गया। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार पूंजीपतियों के ईशारों पर काम कर रही है तथा श्रमिकों के हितों पर डाका डाल रही है।
जनता के पैसे पर चलने वाली योजनाओं के प्रचार में करते हैं अपना प्रचार
श्री रघुवंशी ने कहा कि चाहे देश की सरकार हो या प्रदेश की सभी जनता के पैसे पर अपनी बडी-बडी फोटो लगवा कर कार्यो का बखान करते हैं तथा इस पर ही करोडों रूपयों का राजस्व फूंक दिया जाता है। जबकि देश का मजदूर आज महंगाई की भारी मार झेल रहा है रसोई गैस की टंकी, पेट्रोल-डीजल, दाल, चावल, खाने का तेल आज सबकुछ महंगा हो चुका है। ऐसे में एक श्रमिक के बुढापे का सहारा तथा पुत्र-पुत्री के विवाह के दौरान काम आने वाला प्रोविडेंट फण्ड ही था जहॉं श्रमिक अपनी राशि का उपयोग कर सकता था। परन्तु सरकार की निगाह अब श्रमिकों के बुढापे के सहारे पर आ टीकी है जो कदापी उचित नहीं है।
बैंकों से काली कमाई कर रही सरकार
श्री रघुवंशी ने कहा कि वर्तमान में सरकार राष्ट्रीयकृत बैंकों का निजीकरण करने पर उतारू हो चुकी है, इतना ही नहीं बैंकींग सेवाओं के नाम पर भी मनमानी लूट सरकार द्वारा की जा रही है तथा उपभोक्ताओं को अंधेरे में रखकर करोडों की राशि बैंक खाता धारकों के खातों से लूटी जा रही है, चाहे वह सर्विस चार्ज हों या एटीएम शुल्क सभी नवीन प्रावधान कर उपभोक्ताओं को चुना लगाने का काम सरकार द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बैंकों में पैसा रखने पर कभी श्रमिकों को वेतन के समान राशि मिल जाया करती थी परन्तु वहॉं पर भी ब्याजदरों को लगभग खत्म सा कर दिया गया है, अलबत्ता आने वाले समय तो बैंकों में पैसा रखने पर भी सरकार राशि वसुलने की तैयारी कर रही है।
श्री रघुवंशी ने देश के श्रम संगठनों एवं श्रमिकों से आव्हान किया है कि सरकार की नीतियों का विरोध अवश्य करें नहीं तो श्रमिक हितेशी कानूनों को पूंजीपतियों के दबाव में सरकार पुरी तरह से खत्म कर देगी तथा देश का मजदूर बंधुआ मजदूर बन कर रह जाऐगा। उन्होंने देश में पुनः पूंजीपतियों के रूप में ईस्टइंडिया कंपनी की वापसी तक इस फैसले को करार दिया है।

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