MP NEWS24-18 मार्च को होली व 22 माच्र को रंग पंचमी मनाई जाएगी। त्यौहार की मस्ती में कई केमिकल युक्त रंगों का इस्तेमाल किया जाएगा जो शरीर के लिए हानिकारक हो सकते हैं। रसायन शास्त्र के वरिष्ठ प्राध्यापक धर्मेन्द्र गांधी ने इसे लेकर एडवाईजरी जारी की है। उन्होनंे कहा कि काले रंग कॉपर सल्फेट, लाल में मरकरी सल्फाईड व सिल्वर में एल्युमिनियम ब्रोमाइड होता है। इससे कैंसर, अंधेपन की शिकायत हो कती है। ऐसे में घर पर ही प्राकृतिक कलर तैयार कर उससे सुरक्षित होली खेलें।इन रंगों में यह केमिकल होता है
श्री गांधी के अनुसार काले रंग में लेड ऑक्साईड नामक रसायन होता है जिसके लगाने से त्वचा खराब होने, एलर्जी या अग्जिमा होने का डर रहता है। इसी प्रकार हरे रंग में कॉपर सल्फेट होता है। यह आंखों में चला जाए तो जलन के साथ आंशिक अंधेपन की शिकायत हो सकती है। लाल रंग मरकरी सल्फाईड युक्त रहता है। इससे कैंसर के साथ लकवा होने का डर रहता है। सिल्वर कलर में एल्युमिनियम ब्रोमाईड होता है। इससे भी कैंसर का खतरा रहता है। नीला रंग प्रशियन ब्लू केमिकल युक्त रहता है। इसे ज्यादा मात्रा में लगाने से त्वचा पर खुजली जैसी शिकायत होती है। पर्पल कलर में क्रोमियम आयोडाइड होता है। इसे लगाने से अस्थमा, त्वचा के बदरंगी होने का डर रहता है।
त्यौहार के लिए घर पर भी बनाऐ जा सकते हैं रंग
श्री गांधी के अनुसार हम प्राकृतिक रंग घर पर बना सकते हैं। केसरिया रंग टेशू या पलास के फूलों को पानी में डालकर गर्म करने के बाद ठंडा करें। जिससे रंग तैयार हो जाएगा। यह खुजली या त्वचा संबंधित बीमारी नहीं होने देगा। मेहंदी से हरा रहंग बना सकते हैं। जो शरीर को स्फूर्ति प्रदान करेगा। इसी तरह भूरे रंग पानी में प्राकृतिक कत्था मिलाकर उसे छानकर उपयोग करें। यह गले की खराश को कम करता है। 2 लीटर पानी में एक चम्मच हल्दी मिलाकर उसे गर्म करके ठंडा करें। इससे पीला रंग तैयार हो जाएगा। यह जख्म खत्म करने के साथ सीर दर्द से छुटकारा देगा। इसी कलर को अमलतास के फूल से भी तैयार कर सकते हैं।
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