नागदा जं.--खुदा की इबादत तथा महरूमीन की मगफीर की दुआ कर मनाया शब-ए-बारात का पर्व

MP NEWS24-शुक्रवार को शब-ए-बारात का पर्व मुस्लिम समाजजनों द्वारा मनाया गया। पर्व को लेकर मुस्लिम समाजजनों ने रातभर इबादत में गुजारी। समाज के पुरूष सभी मस्जिदों में एकत्रित हुए और रातभर खुदा की इबादत की वही महिलाओं ने घरों व मोहल्लो में खुदा की इबादत की। चेतनपुरा कब्रिस्तान एवं बायपास स्थित कब्रिस्तान में शाम पांच बजे से मुस्लिम समाजजनों के पहुंचने का क्रम प्रारंभ हो गया था जो देर रात तक चलता रहा, दोनों कब्रिस्तान में इंतेजामिया कमेटी एवं नगरपालिका द्वारा विशेष प्रबंध किए गए थे। इधर सीएसपी मनोज रत्नाकर, टीआई श्यामचंद्र शर्मा ने दोनों कब्रस्तान में पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। जामा मस्जिद के सदर मुन्ना लाला, वरिष्ठ समाजसेवी अब्दुल हमीद, सचिव अजमद लाला, नुरानी मस्जिद के सदर वाहिद लाला, शाकिर मंसुरी, फरीद अंसारी, इसरार सांकले आदि ने पुलिस और प्रशासन का बेहतर व्यवस्स्थाओं के लिए आभार माना।

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शब-ए-बरात दुनिया भर में मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है। शब-ए-बारात को इबादत का त्योहार कहा जाता है। इसे प्रार्थना की रात भी कहा जाता है। त्योहार के नाम में दो महत्वपूर्ण शब्द हैं, शब का अर्थ रात और बारात का अर्थ मासूमियत है। शब-ए-बारात की रात में मुसलमान अपने रिश्तेदारों और दोस्तों की कब्रों पर जाकर उनके लिए दुआएं मांगते हैं। इसके अलावा अपने किए गुनाहों से भी तौबा करते हैं। शब-ए-बारात के मौके पर कई मुसलमान दो दिनों का रोजा भी रखते हैं।

मान्यता है कि शब-ए-बारात में इबादत करने वाले सभी लोगों के सारे गुनाह माफ हो जाते हैं। इसलिए लोग पूरी रात जागकर शब-ए-बारात में अल्लाह को याद करते हैं और अपने किए की माफी मांगते हैं। कहा जाता है कि अल्लाह इस रात जिनके गुनाहों की माफी देते हैं उनके जन्नत के दरवाजे खोल देते हैं।

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