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Nagda(mpnews24)।   नवरात्रि के पावन पर्व के दौरान अष्टमी पूजन के दिन नगर पालिका परिषद द्वारा पेयजल वितरण नहीं किए जाने के चलते शहर के नागरिकों में काफी आक्रोश देखा गया। मामले में प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर पालिका द्वारा अल सुबह मुनादी करवा कर पेयजल वितरण नहीं होने की जानकारी दी। बताया जाता है कि भार्गव काॅलोनी की टंकी का वाॅल खराब हो जाने के कारण शनिवार को पेयजल का वितरण नहीं हो पाया है। इस पुरे मामले में नपा की घोर लापरवाही भी सामने आ रही है जिसके चलते आए-दिन पेयजल वितरण आदि नहीं होना प्रमुख है। शहर के नागरिकों का कहना है कि नवरात्रि पर्व के दौरान भी नपा अपनी कारगूजारियों से बाज नहीं आई तथा अष्टमी के दिन ही पेयजल वितरण नहीं किया गया, और ना ही पेयजल वितरण नहीं होने की मुनादी एक दिन पूर्व करवाई गई। शहरवासियों का कहना है कि करोडों के बजट वाली नगर पालिका कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर सकती है। वहीं धार्मिक त्यौहारों के दौरान ही पेयजल वितरण नहीं किए जाने से नपा के प्रति नागरिकों में काफी आका्रेश भी देखा गया।



Nagda(mpnews24)।   बुराई पर सच्चाई की जीत के प्रतीक विजयादशमी पर्व पर इस वर्ष शहरवासियों को कोरोना महामारी काल के चलते दशानन का दहन देखने को नहीं मिलेगा। विजयादशमी पर्व पर रविवार को शहर में दो स्थानों पर रावण दहन कार्यक्रम आयोजित होगा। दोनो स्थानों पर आयोजन समिति द्वारा तैयारियां लगभग पूर्ण कर ली गई है। कलाकारों द्वारा रावण के पुतले को अंतिम रूप दिया जा रहा है। रावण दहन के दौरान आतिशबाजी भी की गई। कोराना के चलते मध्यप्रदेश शासन की गाईड लाईन के अनुसार रावण दहन के लिए जनता को प्रतिबंध किया गया है। जिसके चलते दोनों स्थानों पर मैदान के आसपास पुलिस प्रशासन द्वारा बेरिगेट्स लगाए गए है ताकि कोई भी व्यक्ति आयोजन स्थल पर ना जा सके। यहां तक की रविवार को शहर में मुनादी भी करवाई जाएगी। रावण दहन शाम 7 बजे होगा। उसके 1 घंटे पूर्व मार्ग प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। रावण दहन के बाद बेरिगेट्स हटा दिए जाएगे व मार्ग को आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। रावण दहन सिर्फ आयोजन समिति द्वारा ही किया जाएगा। जिसके लिए प्रशासन द्वारा दोनों समिति के सदस्यों को रविवार सुबह पास वितरण किए जाएगे। प्रशासन के इस निर्णय से शहरवासियों में नाराजगी भी है।

इन स्थानों पर होगा रावण दहन
रावण दहन शहर में लगभग 47 वर्षो से किया जा रहा है। इसकी शुरूआत मंडी क्षेत्र में पुलिस थाने के पीछे एक मैदान में हुई थी। जबसे इस मैदान का नाम दशहरा मैदान पड़ गया। यहां पर सार्वजनिक दशहरा उपलक्ष्य समिति द्वारा प्रतिवर्ष 71 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाता है। यहां पर आकर्षक आतिशबाजी व विद्युत सज्जा भी की जाती है। इस आयोजन के मुख्य आयोजनकर्ता पूर्व नपा अध्यक्ष बालेश्वरदयाल जायसवाल,बद्रीलाल पोरवाल, राधेश्याम कामरिया ,जगदीश मेहता आदि है। इसी  प्रकार बिरलाग्राम के ग्रेसिम खेल परिसर में राजस्थान नवयुवक मंडल द्वारा रावण दहन किया जाता है। यहां पर राजस्थान नवयुवक मंडल द्वारा वर्ष 2004 में रावण दहन का आयोजन प्रारंभ किया गया। यह आयोजन पूर्व विधायक दिलीपसिंह शेखावत, मध्यप्रदेश शासन में पूर्व केबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त सुल्तानङ्क्षसह शेखावत, पूर्व नपा उपाध्यक्ष सज्जनसिंह शेखावत आदि द्वारा किया जाता है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने किया स्थल का निरीक्षण
विजय दशमी की तैयारियों को लेकर शनिवार को शाम को एसडीएम आशुतोष गोस्वामी, सीएसपी मनोज रत्नाकर, मण्डी थाना प्रभारी श्यामचन्द्र शर्मा, मुनपा अधिकारी अशफाक खान, नोडल अधिकारी बसंतसिंह रघुवंशी, नपा इंजीनियर जीएल गुप्ता, आबिद अली, अजीत तिवारी आदि प्रशासनिक अधिकारियों ने दशहरा मैदान एवं ग्रेसिम खेल परिसर की व्यवस्थाओं का निरीक्षण लिया।

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प्रशासन ने की अपील

कोरोना महामारी को मद्देनजर रखते हुए प्रशासन द्वारा प्रतीकात्मक रूप से दशहरा उत्सव की अनुमति दी गई है, जिसमें जनता का रावण दहन मैदान स्थल पर प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। अतः नागदा की जनता से निवेदन है कि रावण दहन हेतु चिन्हित दशहरा मैदान स्थल कि और जाने वाले मार्ग पर बैरिकेडिंग रहेगी किसी भी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए दशहरा मैदान स्थल की ओर आने वाले रास्तों पर सायं 5 बजे से लेकर 8 बजे तक ना जाएं।

इनका कहना
कोविड-19 संक्रमण के खतरे के चलते इस वर्ष शहर में आयोजित होने वाले रावण दहन कार्यक्रम में आयोजन स्थल पर नागरिकों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। शासन की गाईड लाईन के तहत ही आयोजन होंगे।
आशुतोष गोस्वामी, अनुविभागीय अधिकारी, नागदा



Nagda(mpnews24)।   शहर कांग्रेस महासचिव स्वदेश कुमार क्षत्रिय के नेतृत्व में शनिवार को मुख्य नगर पालिका अधिकारी को नगर की सड़को में हो रहे गढ्ढो के कारण होने वाली दुर्घटनाओं के चलते सड़को के पेंचवर्क हेतु एक आवेदन दिया गया।

प्रेषित आवेदन में उन्होंने अवगत कराया कि नगर की सड़को पर बारिश के पश्चात् इतने गढ्ढे हो गये है कि वाहन चलाना मुश्किल हो रहा है साथ ही पुराने ओव्हर ब्रिज एवं बिरलाग्राम ओव्हरब्रिज पर जहाँ यातायात का दबाव अत्यधिक होता है, बड़े-बड़े गढ्ढे होने के कारण आए दिन दुर्घटनाए होती है। खासकर त्योहारो एवं शादी के समय सड़को पर बड़ी संख्या में लोग सड़को पर निकलते है। जिससे दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। इन सड़को का पेंचवर्क तुरंत कराया जाना अतिआवश्यक है। जिससे नगर की जनता की जान की रक्षा हो सके। क्षत्रिय ने आवेदन देकर मांग की है कि जनता की सुरक्षा को देखते हुए जल्द से जल्द पेंचवर्क कार्य प्रारम्भ करवाया जाए।

 



Nagda(mpnews24)।   अपना घर बनाने का सपना संजोने वाले देशवासियों को काॅलोनाईजरों के नापाक मंसूबों से बचाने एवं उनके हितों की रक्षा हेतु रेरा जैसा महत्वपूर्ण कानून वर्ष 2016 में ही सरकार द्वारा बना दिया गया था। बावजुद इसके चार वर्षो तक प्रशासन द्वारा इस महत्वपूर्ण कानून की अनदेखी की गई। सबकुछ अधिकारियों की आंखों के सामने घटता रहा लेकिन अधिकारी चार वर्षो से कुछ नहीं बोले तथा अचानक अवैध काॅलोनाईजरों पर कार्रवाई की मुहिम प्रारंभ कर दी गई है। जबकि चाहिए यह था कि कानून के लागू होते ही इसका पालन क्षेत्र में भी होना चाहिए था। रेरा जैसे महत्वपूर्ण कानून की अनदेखी का ही परिणाम है कि अवैध काॅलोनाईजर इतने फल-फूल गए। वहीं प्रशासन पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं कि आखिर इतने समय तक चुप रहने के बाद आखिर किन लोगों के कहने पर प्रशासन ने इतना बडा कदम उठा लिया जिसके चलते अब क्षेत्र में अचल संपत्तियों के भाव आसमान पर पहुॅंचने की संभावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है।

क्या है रेरा कानून
भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण मध्यप्रदेश (रेरा) एक ऐसी संस्था है जो अपना घर बसाने हेतु खून पसीने की कमाई को काॅलोनाईजरों को सौंपते है। ऐसे लोगों के हितों की रक्षा के लिए ही देश में रेरा कानून लागू किया गया है। कानून के जानकारों के अनुसार जो भी काॅलोनी रेरा में पंजीकृत होती है उसके प्लाॅट, मकान धारकों को यदि काॅलोनाईजर परेशान करता है तो संबंधित की परेशानी का निराकरण तय समय सीमा उक्त कानून के तहत किया जाता है तथा प्राधिकरण में निर्णय होने के बाद इसकी अपील सीधे सर्वोच्च न्यायालय में ही की जा सकती है। ऐसे में गरीब एवं जरूरतमंद लोगों के हितों की रक्षा के लिए उक्त कानून बेहद ही कारगर है।

हर 500 वर्ग मीटर से अधिक के प्रोजेक्ट के लिए रेरा आवश्यक
रेरा कानून की धारा 3(2) यह कहती है कि जहाॅं भी 500 वर्ग मीटर अर्थात 5382 स्कवेयर फीट से कम का प्रोजेक्ट बनाया गया है वहाॅं रेरा पंजीयन की आवश्यकता नहीं होगी। लेकिन इससे अधिक यदि कोई काॅलोनाईजर अपना प्रोजेक्ट बना कर प्लाॅट या भवन विक्रय करता है तो उसे अपना पंजीयन रेरा कानून के तहत करवाना ही होगा। ऐसा नहीं करने पर वह इस कानून के उल्लंघन का दोषी माना जाऐगा। साथ ही कानून में यह भी प्रावधान है कि कोई काॅलोनाईजर यदि 8 से अधिक प्लाॅट/भवनों को विक्रय, निर्माण का प्रोजेक्ट बनाता है तो उसे रेरा कानून का पालन आवश्यक होगा। इससे कम के लिए यह लागू नहंी किया जा सकता है।

वर्ष 2016 के पूर्व कम्पलीट हुए प्रोजेक्ट ही रेरा के दायरे से बाहर, शेष सभी पर पंजीयन आवश्यक
रेरा कानून वर्ष 2016 में लागू किया गया है। उक्त कानून के लागू होने के पूर्व जो भी प्रोजेक्ट अर्थात काॅलोनी के प्लाॅट, भवन विक्रय होकर यदि काॅलोनी संबंधित नगर पालिका अथवा नगर निगम को हस्तांतरित हो चुकी है तो उक्त काॅलोनी पर रेरा कानून लागू नहीं होता है। लेकिन इसके बाद बनने वाले सभी प्रोजेक्ट जो 500 वर्गमीटर के दायरे से अधिक हैं पर रेरा कानून लागू होता है तथा सभी काॅलोनाईजरों को इसके तहत अपना पंजीयन हर हाल में करना होता है। यदि रेरा के तहत कोई काॅलोनी पंजीकृत नहीं हेाती है तो उसे अवैध ही माना जावेगा।

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प्रशासन की छूट ने ही बढाऐ अवैध काॅलोनाईजरों के हौसले

रेरा कानून वर्ष 2016 में लागू होने के बाद भी क्षेत्र में पदस्थ किसी भी अधिकारी ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। इतना ही नहीं बीते कुछ सालों में इन अवैध काॅलोनाईजरों को प्रशासन एवं राजनेताओं का भी काफी सहयोग मिला। जिसका परिणाम यह हुआ कि शहर के आसपास के क्षेत्रों में लगी कृषि भूमियों को समतल कर वहाॅं पर बेतहाशा आवासीय प्लाॅट काट दिए गए तथा यह दौर सबसे अधिक वर्ष 2016 के बाद से ही प्रारंभ हुआ। उस दौरान कई अधिकारी क्षेत्र में पदस्थ रहे लेकिन ततसमय कोई कार्रवाई नहीं की गई। यकायत प्रशासन की कार्रवाई पर भी कई सवाल खडे हो रहे हैं। वहीं नागरिकों का तो यह भी कहना है कि कार्रवाई सिर्फ ढाक के तीन पात तक ही सिमित रहेगी तथा काॅलोनाईराजनों में दहशत पैदा कर कुछ लोग अपना मकसद हल कर फिर इसे ढंडे बस्ते में डाल देंगे।

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शहर में मात्र एक काॅलोनी रेरा में पंजीकृत

शहर में एक मात्र टाउनशीप आरएम धारीवाॅल टाउनशीप ने ही रेरा में अपना पंजीयन करवाया है। आरएमडी का पंजीयन पी-एनजीडी-17-380 है तथा इसकी वैद्यता 8 सितम्बर 2017 से 31 दिसम्बर 2018 तक होने की जानकारी भी भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण मध्यप्रदेश (रेरा) के अधिकृत पोर्टल पर दर्ज है। इसके अलावा अन्य कोई नाम इसमें दर्ज नहीं है। ऐसे में इस बात साफ हो चुकी है कि शेष सभी प्लाॅटिंग साईट अवैध है। ऐसे में प्रशासन अब किन-किन पर कार्रवाई करता तथा करता भी है या नहीं ? यह तो आने वाला समय ही बताऐगा।



Nagda(mpnews24)।   नवरात्रि पर्व पर माॅं दुर्गा की आराधना में भक्तगण लीन है। इसी क्रम में गुरूवार को किरण टाॅकिज चैराहे पर विराजित माॅं दुर्गा पाण्डाल में विश्वयुवा मण्डल द्वारा महाआरती का आयोजन किया गया। यहाॅं मण्डल द्वारा वेष्णोदेवी मंदिर की प्रतिकृति का निर्माण भी किया गया है जिसे निहारने के लिए प्रतिदिन बडी संख्या में भक्तगण पहुॅंच रहे है।


महाआरती में बतौर अतिथि प्रेस क्लब अध्यक्ष राजेश रघुवंशी, पत्रकार सलीम खान, दीपक चैहान, अशोक दायमा, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अशोक मालवीय, पूर्व पार्षद हरीष अग्रवाल, वरिष्ठ समाजसेवी ब्रजमोहन राठी आदि ने शिरकत की। यहाॅं सभी अतिथियों ने माताजी की महाआरती की। इस अवसर पर मण्डल के संस्थापक पूर्व पार्षद राजेश धाकड ने सभी अतिथियों का शब्दों से स्वागत किया। यहाॅं बडी संख्या में मातृशक्ति भी उपस्थित थी। मण्डल द्वारा आयोजन स्थल पर आकर्षक फव्वारा भी लगाया गया है जो आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है।



Nagda(mpnews24)।   जाने-माने चिकित्सक एवं पूर्व ब्लाॅक मेडिकल आॅफिसर डाॅ. संजीव कुमरावत ने बताया कि कोविड-19 से एलर्जिंक एवं अस्थमा के मरीज सुरक्षित हैं। उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कोरोना वायरस हमारे शरीर के सेल (कोशिका) में एसीई-2 (एंजियो टेनसिन कनवरटिंग एन्जाईम-2) के माध्यम से प्रवेश करता है।


एसीई-2 रिसेप्टर मुख्यतः किडनी, इन्टेस्टाइन (आंत), लग्स, हार्ट में पाये जाते हैं। श्वसन तंत्र में यह एसीई-2 रिसेप्टर नाक व गले की सतह रपिथेलियम, एयर बे, फेफडों में निमोसाइट टाईप-2 पाये जाते हैं। जितने ज्यादा एसीई-2 रिस्पेटर होंगे उतनी ज्यादा सम्भावना कोविड होने की होगी। हाई ब्लड पे्रशर, डायबिटिज, धुम्रपान और मोटापा इन में एसीई-2 रिस्पेटर की संख्या ज्यादा होती है। ऐसे में कोविड की सम्भावना भी ज्यादा होगी। इसलिये इनको हाई रिस्क फैक्टर कहते है।

डाॅ. कुमरावत ने बताया कि कोविड महामारी के शुरूआत में यूएस के सेन्ट्रल आॅफ डिजिज कंट्रोल ने एलर्जिक अस्थमा को भी कोविड के लिये हाईरिस्क माना था। एलर्जिक अस्थमा में मानव शरीर किसी भी एलर्जी के लिये हाइपर एक्टिव हो जाता है। यह एलर्जी धुल के कण, पराग कण, सुगंध (इत्र), जानवरों जैसे बिल्ली, कुत्ता, बकरी, खरगोश आदि के रेेशे से हो सकती है।

डाॅ. कुमरावत ने बताया कि यह एलर्जन जब शरीर में प्रवेश करते हैं तो इम्युन सिस्टम हाइपर एक्टिव हो जाता है और एंटीबाॅडी बनाता है। यह एंटीबाॅडी कई केमिकल निकालती है जिनको ल्युकोट्रिन कहते हैं। इन केमिकल के कारण एयर वे (श्वास नली) में सूजन आ जाती है, बहुत ज्यादा म्युकस निकलता है जिसके कारण श्वास नली संकरी हो जाती है, जिससे सांस लेने में तकलीफ होने लगती है, सकरी नली से हवा निकलती है तो घरघराहट की आवाज आती है।
सीडीसी यूएस का यह मानना था कि चुंकि अस्थमा में पहले ही श्वास नली संकरी हो जाती है और यदि इन मरीजों को कोविड हुआ है तो सांस लेने में दिक्कत और बढ जायेगी इसलिये एलर्जिक अस्थमा को कोविड-19 के लिये हाई रिस्क माना गया था। लेकिन यूएस की युनिवर्सीटी के डाॅ. डेनियल जे. जेक्सन विलियम और उनकी टीम ने चीन के कोविड मरीजों के डेटा का एनालिसिस किया तो उन्होंने पाया कि चीन में कोविड मरीजों एलर्जिक अस्थमा के मरीजों की संख्या बहुत कम है। यह उनको आश्चर्य की बात लगी तब उन्होंने अस्थमा के मरीज पर स्टडी की।

डाॅ. कुमरावत ने बताया कि यूएस में अपने प्रयोगों के आधार पर उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि जिन अस्थमा के मरीजों में मिडियम एवं हाई एक्टिविटी थी उमें एसीई-2 रिसेप्टर क संख्या कम पायी गयी। एसीई-2 रिसेप्टर की संख्या कम पायी गयी। एसीई-2 रिसेप्टर की संख्या कम होने का अर्थ है कोविड होने की सम्भावना कम होना। उन्होंने एक और प्रयोग किया उन्होंने ऐसे मरीजों का ग्रुप बनाया जिनको एलर्जी थी उन मरीजों को जिस वस्तु से एलर्जी थी उस वस्तु का एक्सपोजर किया तो उन्होंने पाया कि कि मात्र 8-48 घंटे में एसीई-2 रिसेप्टर की संख्या बहुत कम हो गयी यानि कोविड के चांस कम हो गये तब उन्होंने निष्कर्ष दिया कि एलर्जिक अस्थमा में जिन मरीजों में हाइपर एक्टिवीटी रहती है उन मरीजों में एसीई-2 रिसेप्टर की संख्या कम होती है, चुंकि एसीई-2 रिसेप्टर से ही कोरोना वाईटस सेल में इन्ट्री करता है। इसलिये एलर्जिक अस्थमा में मरीज कोविड से सुरक्षित रहते हैं।

डाॅ. कुमरावत ने कहा कि इसका यह अर्थ नहीं है कि एलर्जिक अस्थमा के मरीज लापरवाही करें उनको मास्क, सोशल डिस्टेंस और हाथ धोने की पुरी सावधानी बरतना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह स्टडी सिर्फ एलर्जिक अस्थमा के लिये हैं ऐसे अस्थमा जो कोल्ड, स्ट्रेस एस्पिरिन आदि से आते हैं वो कोविड के लिये हाईरिस्क हैं।



Nagda(mpnews24)।   वार्ड नम्बर 25 के आदित्य नगर अमलावदियां रोड मारुति गार्डन के आसपास के रहवासियों ने क्षेत्र मे नाली निर्माण करवाने को लेकर मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य बसंत मालपानी के नेतृत्व में शुक्रवार को ज्ञापन नगर पालिका नागदा के प्रशासक एसडीएम आशुतोष गोस्वामी को सौपा। रहवासियों के हस्ताक्षरित ज्ञापन मे उलेख किया गया की क्षेत्र के मकानों के आगे, सड़कों पर व खुले प्लाटो पर घरों से निकलने वाले गंदे व बदबूदार पानी का जमावड़ा है।कारण क्षेत्र मे नाली न होने से पानी की निकासी न होना है।गंदे पानी के जमावड़े से क्षेत्र मे मलेरिया,डेंगू फैलने की आशंका है।

ज्ञापन में कहा गया की हमारे द्वारा कई बार नगर पालिका के अधिकारियों को आवेदन व निवेदन कर नाली बनवाने की गुजारिश की गई लेकिन मात्र आश्वासन के कुछ नही मिला। नाली बनवाकर स्वस्थ माहौल में जीवन देने का अनुरोध एसडीएम से किया गया। इस मौके पर मालपानी ने कहा की सम्पूर्ण नागदा मे जगह जगह भारी मात्रा मे पानी जमा है लेकिन उसके निकास की कोई व्यवस्था नही है। नपा अधिकारी मौके पर जाना नही चाहते, समस्याएं विकराल रूप ले रही है, अगर इन समस्याओं का शीघ्र हल नही किया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

ज्ञापन देते समय मोहनलाल सोनी, अरुण शर्मा, सुरेश साहनी, धर्मराज मीणा, दिनेश शुक्ला, मेहमूद मंसूरी, सत्यनारायण पांचाल, देवीलाल गुर्जरवाडिया, बाबु पाटीदार, सुख देवधर दुबे, संजय पाठक, अंकित दुबे, सुरेश शर्मा, उदयसिंह शेखावत, निशा परिहार, आशीष परमार, इरफान शेख, हेमंत जैन, भारतसिंह डोडिया, धीरजसिंह डोडिया, जितेंद्र पंवार, राजेन्द्र मरमट, आकाश निषाद आदि रहवासी उपस्थित थे। ज्ञापन का वाचन अंकित दुबे ने किया।

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